Tuesday, April 4, 2017

मानवता खोता भारत

इस 4G  युग में भारत तेज़ी से आगे बढ़ दुनिया को अपनी ताक़त और शक्ति का पुरजोर प्रदर्शन कर रहा है, समस्त विश्व में भारत का नाम ज़ोर शोर से लिया जा रहा है और क्यों न लिया जाए भारत इतनी विविधताओं का देश होने के बावजूद भी विश्व के तमाम शक्तिशाली देशों को चुनौती देने में सक्षम है इसका सबसे ताज़ातरीन उदाहरण भारत एक रॉकेट से 104 सैटेलाइट्स को एक बार में भेजने वाला पहला देश है. खैर उदाहरण की कोई कमी नही भारत में दुनिया में शीर्ष तेल खपत वाले देशों में भी भारत की रैंकिंग दिन प्रतिदिन बढ़ रही जिससे साफ़ तौर पर ज़ाहिर है की भारत आगे बढ़ रहा है. भारत को आगे बढ़ाने में हर उस शख्स का योगदान है जो दिनरात एक कर अपनी पूरी लगन व इमानदारी के साथ काम करते हैं, पर कहते हैं कोई भी चीज़ मुफ्त नही मिलती इस कामयाबी के लिए भी कीमत चुकानी पड़ेगी और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है और भारत उस दौर में है जहां तकनीक तो दिन दूनी रात चौगुनी तररकी कर रही है पर दूसरी ओर भारत में मानवता बुरी तरह दम तोड़ रही है इसका एक प्रमुख कारण दूषित मानसिकता भी है.

भारत में मानसिक रोगियों की संख्या में बिजली की तेज़ी से वृद्धि हुई है नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस द्वारा अक्टूबर 2016 में जारी रिपोर्ट बताती है की भारत की कुल आबादी का 13.7% जनसंख्या विभिन्न मानसिक रोगों से पीड़ित है ये हमारे समाज के लिए ख़तरे की घंटी ही है, और ये भारत के सुदूर कोनों से लेकर शहरों और महानगरों हर जगह देखा जा सकता है. 



कुछ रोज़ पहले सड़क से गुज़रते वक़्त एक व्यक्ति को सड़क के बीचोंबीच औंधे मुंह गिरा पाया, उस जगह अँधेरा होने के कारण आती जाती गाड़ियां स्ट्रीट लाइट न होने के कारण उसके बिलकुल पास से होकर अचानक से मुड़ती। वो बमुश्किल ही अपना सर ही सड़क से ऊपर उठा पा रहा था मुझसे न रहा गया तो मैं उसके पास जाकर उसे आवाज लगाई जवाब में उसने रुंधे स्वर में कहा की एक्सीडेंट हो गया है भैया। मैंने उसे उठने को कहा तो उसने फिर जोर लगाया पर न उठ सका इस बीच मैंने उसके बगलों में हाथ लगाकर उसे उठाने की कोशिश की तो पाया उसके शरीर में जैसे जान ही न हो बिलकुल वैसे लग रहा था जैसे कोई कुछ दिन पहले पैदा हुआ कोई बच्चा खैर जैसे तैसे उसे सड़क के बीच डिवाइडर पर बिठाया, और सड़क पर उसके बिखरे कुछ सिक्कों को उसके हवाले कर ही रहा था तो मैंने देखा आने जाने वाले मुझे बड़ी विस्मयी नज़रों से घूरते जाते उसे वहां छोड़ मैं चलने लगा तो एक सज्जन पास आकर बोले "भाई क्यों करते हो इनका लोगों रोज़ का है", उस वाक्य को सुन मैं अवाक् हो घर चला आया रस्ते में यही सोचता रहा की उठाने कोई नही आया तो ज्ञान देने क्यों चला आया!!

लोग मतलबी होते जा रहे हैं या ज्यादा प्रैक्टिकल होते जा रहे हैं और शायद यही कारण है आपके आस पास कोई जरूरतमन्द दिखता है तो उसकी मदद की जगह उसके वीडियो बनाने में ज्यादा मसरूफ़ लोग आपको ज्यादा दिखेंगे। कोई जमाने को दोष देता है तो कोई परिस्थियों को तो किसी के पास समय नही है, ये वो देश है जहाँ विश्व के सर्वाधिक लोग दिन भर का समय टीवी पर क्रिकेट देखने में बिता सकते है पर किसी की मदद में समय दे ये इनकी शान के खिलाफ होगा। इन तमाम छोटे सवालों को इग्नोर कर हम आगे बढ़ते रहते हैं और ये छोटी छोटी बातें अब हमारे समाज को प्रभावित कर रही हैं मानवता पल पल यहां दम तोड़ रही है| इसी का असर है की एक पति अपनी जीवनसंगिनी के शव को कन्धों मीलों ढोता है और कहीं किसी नारी को लोगों से भरी ट्रेन में जबरन तेज़ाब के घूँट पिलाये जाते हैं और लोग देखते हुए भी अनदेखा कर जाते हैं। सिर्फ जनता ही नही यहाँ प्रशासन भी मूकदर्शक है यहां, यहां लोग मदद के लिए नही कैंडल मार्च के लिए घरों से निकलते हैं.


ज़रा सोचिये आपने आखिरी बार मानवता कब दिखाई वो क्या चीज़ थी जिसके लिए आपने अपना स्वार्थ परे रख किसी अनजान की मदद कर दिया, ये सवाल क्या आपके जेहन में भी आता है ?  किसी जरूरतमंद की मदद कर दो ये सोचकर की कल को आपको मदद की जरूरत न पड़े। 

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