Saturday, April 15, 2017

विश्वविख्यात काशी की गंगा आरती

वाराणसी, काशी या बनारस हिन्दू समुदाय के लिए अध्यात्म, संस्कृति और धर्म की नगरी है. इसे काल के देव महादेव की नगरी भी कहा जाता है और जिसके मिजाज़ को समझने के लिए पर्यटक बारहों मास बनारस की और रुख करते हैं. यूँ तो मोक्ष की इस नगरी में देखने समझने को बहुत कुछ है लेकिन कुछ चीज़ों का अतिमहत्व है और उनमे से एक "गंगा आरती" भी है. भिन्न भिन्न प्रकार के धूप दीपों से हर दिन मोक्षदायिनी माँ गंगा की भव्य आरती की जाती है. इसे मनोरम दृश्य को निहारने देश विदेश से आये हज़ारों की संख्या में पर्यटक जब घाटों के किनारे जब एकत्रित होते हैं तो वक़्त मानो जैसे थम सा जाता है. आपके सामने तस्वीरों के माध्यम से इस विश्वविख्यात आरती की झलकियां प्रदर्शित करने कोशिश कर रहा हूँ, आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा!!   
नौका विहार
आरती दर्शन के लिए आमतौर पर लोगों की भीड़ शाम से ही इकट्ठी होने लगती है और उस वक़्त इन काठ के नावों की सवारी एक अलौकिक सुख देता है. कल कल करती गंगा की लहरों पर सवारी कर घाटों को ख़ूबसूरत छटा को निहारना शब्दों में बयां करना मुश्किल है.


यहाँ की गंगा आरती दुनियाभर में प्रसिद्ध

दस अश्वमेध यज्ञ की सफल पूर्णाहुति के कारण यह घाट दशाश्वमेध कहलाता है.

संध्या आरती के लिए तैयार रखे दीये

घाटों की धुलाई सफाई के बाद चौकियों पर आसान लगाए जाते हैं  तत्पश्चात माँ गंगा की मूर्ति स्थापित की जाती है. ताज़े फूल लुटिया में गंगा जल और आरती के दीपों को बड़े क़रीने से यथास्थान जमाकर रखा जाता है. आरती के हर  चरण के लिए अलग टीमें होती हैं यानी आरती के तैयारी की टीम अलग व् आरती को मूर्त्य रूप देने के लिए अलग.

आरती दर्शन के लिए घाट पर उमड़े लोग

घाटों पर जगह की कमी के कारण लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ता है. घाटों के किनारे कुर्सी सहित बड़े आकार की नावों पर बैठ लोग आरती दर्शन कर आनन्दित होते हैं. अँधेरे में जब घाटों की बत्तियां जल उठती हैं तब रंग बिरंगे लाईटों की रौशनी से नहाये घाट और  मनमोहक लगते हैं.

मंत्रोच्चारण से माँ गंगा का आह्वान

ख़ास वेश में तैयार पुजारी आरती की शुरुआत करते है. सारे मंत्र और श्लोक इन्हे कण्ठस्थ होते है परिणामतः पूरी आरती के दौरान इनका तालमेल दर्शकों को विस्मृत करता है.

आरती की शुरुआत अगरबत्ती से होती है

आरती में कई तरह के वस्तुओं  का प्रयोग होता है जिसमे कई तरीकों के दीप और दीये शामिल हैं और इन दीपों के माध्यम से बारी बारी आरती की जाती है. 
 सुगन्धि आरती
घी के बत्तियों की आरती

चारों दिशाओं में आरती के दीपों को दिखाकर ही आरती सम्पूर्ण मानी जाती है.
जयजयकार के साथ आरती की पूर्णाहुति

जयजयकार के साथ ही सारा घाट गूँज उठता है, समस्त दर्शन को आये लोग अपना हाथ उठाकर ईश्वर को धन्यवाद कर उनका अभिवादन करते हैं साथ ही आपको विदेशी सैलानी भी पूरी तरह आरती में सम्मिलित होते नज़र आएंगे।


शंखनाद से समापन की उदघोषणा

शंखनाद अंतिम प्रक्रिया है जिसे आरती के प्रारम्भ एवं समापन के समय बजाया जाता है.


सारे फोटोग्राफ कॉपीराइट के अधीन हैं - शिवांशु गुप्ता 

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