वाराणसी, काशी या बनारस हिन्दू समुदाय के लिए अध्यात्म, संस्कृति और धर्म की नगरी है. इसे काल के देव महादेव की नगरी भी कहा जाता है और जिसके मिजाज़ को समझने के लिए पर्यटक बारहों मास बनारस की और रुख करते हैं. यूँ तो मोक्ष की इस नगरी में देखने समझने को बहुत कुछ है लेकिन कुछ चीज़ों का अतिमहत्व है और उनमे से एक "गंगा आरती" भी है. भिन्न भिन्न प्रकार के धूप दीपों से हर दिन मोक्षदायिनी माँ गंगा की भव्य आरती की जाती है. इसे मनोरम दृश्य को निहारने देश विदेश से आये हज़ारों की संख्या में पर्यटक जब घाटों के किनारे जब एकत्रित होते हैं तो वक़्त मानो जैसे थम सा जाता है. आपके सामने तस्वीरों के माध्यम से इस विश्वविख्यात आरती की झलकियां प्रदर्शित करने कोशिश कर रहा हूँ, आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा!!
| यहाँ की गंगा आरती दुनियाभर में प्रसिद्ध दस अश्वमेध यज्ञ की सफल पूर्णाहुति के कारण यह घाट दशाश्वमेध कहलाता है. |
| मंत्रोच्चारण से माँ गंगा का आह्वान ख़ास वेश में तैयार पुजारी आरती की शुरुआत करते है. सारे मंत्र और श्लोक इन्हे कण्ठस्थ होते है परिणामतः पूरी आरती के दौरान इनका तालमेल दर्शकों को विस्मृत करता है. |
| आरती की शुरुआत अगरबत्ती से होती है आरती में कई तरह के वस्तुओं का प्रयोग होता है जिसमे कई तरीकों के दीप और दीये शामिल हैं और इन दीपों के माध्यम से बारी बारी आरती की जाती है. |
| सुगन्धि आरती |
| घी के बत्तियों की आरती चारों दिशाओं में आरती के दीपों को दिखाकर ही आरती सम्पूर्ण मानी जाती है. |

har har mahadev
ReplyDeleteBohat sundar vyaakhyaan..:)
ReplyDeletebahut shukriya...
Deletenice clicks Shivanshu
ReplyDeletethank you dear...
Deleteअद्भुत
ReplyDeletebahut shukriya sir...
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