Monday, April 17, 2017

हॉलिडे नेशन बनता भारत

भारत में दैवीय शक्तियां काम करतीं हैं इसमें कोई दो राय नहीं, और इस बात की पुष्टि इसी बात से की जा सकती है कि इतने छुट्टियों का देश होने के बावजूद हम तरक्की के मार्ग पर अग्रसर हैं. अगर आप समस्त भारत का वर्ष 2017 की हॉलिडे लिस्ट देखें तो आपको पता चलेगा की विश्व की सर्वाधिक छुट्टियों वाला देश हैं हमारा भारत। इस लिस्ट में कुल 141 छुट्टियों का प्रावधान है जिनमें राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय अवकाश सम्मिलित किये गए हैं।  इसके अलावा इस वर्ष  कुल 53 इतवार और कर्मचारियों को मिलने वाली 15 दिनों के अवकाश को जोड़ ले तो पूरे वर्ष में सिर्फ 156 कार्य-दिवस ही शेष बचते हैं. इसके बावज़ूद भी आपको अक्सर लोग शिकायतें करते मिलेंगे कि अरे इस बार फलां छुट्टी इतवार को पड़ गयी या इस नई सरकार ने ये छुट्टी कैंसिल कर दी वग़ैरह-वग़ैरह . वास्तव में इन छुट्टियों को कोई ख़ास ज़रूरत नहीं है ये छुट्टियाँ भारतीय राजनीति का एक अहम हिस्सा है. आपने देखा होगा हर बार चुनाव के बाद सत्ता में आयी पार्टी अपनी खास नीति के तहत कुछ स्पेशल छुट्टियाँ घोषित करता है जो वास्तविकता में किसी खास वर्ग या समुदाय को लुभाने की कोशिश में की जाती हैं जिससे उस समुदाय या वर्ग का ध्यान पार्टी की तरफ़ आकर्षित किया जा सके. आगे चलकर ये छुट्टियाँ अवकाश तालिका में अपनी परमानेंट जगह बना लेती हैं.

सारी छुट्टियों को निकाले तो 365 दिनों से सिर्फ 156 दिन ही कार्यदिवस के रूप में बचते हैं, और बाकी के दिनों की मुफ़्त पग़ार को हर महीने कर्मचारियों के बैंक खाते में क्रेडिट करने वाला देश भारत ही होगा शायद। एक बार किसी विदेशी अर्थशास्त्री ने कहा था की "भारत में जरूर कोई न कोई दैवीय शक्ति है जो इतने बड़े घोटालों के बाद भी इसका प्रभाव नहीं होता". उनकी ये बात यहाँ भी लागू होती है वरना ऐसा कौन सा देश होगा जहाँ पुरे वर्ष में आधे से ज्यादा दिन छुट्टी के बावज़ूद  यहाँ काम चल रहा है और देश आगे बढ़ रहा है. यहां एक पक्ष ये भी है कि उपरोक्त सारी सुविधाएं सिर्फ सरकारी कर्मचारियों पर लागू होती हैं जिसका सीधा असर उन करोड़ों कर्मचारियों पर पड़ता है जो किसी निजी फर्म या एजेंसियों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है, एक कहावत है की "एक पैर में मख़मल का पजामा दूसरा पांव नंगा" ये बात इस परिस्थति में बिल्कुल सटीक बैठती है. 

फ़ोटो - गूगल 










अगर हम अपने पड़ोसी देशों से तुलना करें तो चीन की वर्ष 2017 की अवकाश तालिका में सिर्फ 25 अवकाश हैं तो वहीँ बांग्लादेश में 22, श्रीलंका में 25 और पाकिस्तान में सिर्फ 21 दिनों को ही अवकाश तालिका में जगह दी गयी है. भारत की विविधता यहां के अवकाश तालिका में भी दिखाई पड़ती है क्यूंकि अन्य देशो की तरह यहाँ सिर्फ राष्ट्रीय अवकाश ही नहीं है यहां सबसे ज्यादा अवकाश क्षेत्रीय स्तर पर होते हैं. इनदिनों उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन फ़िज़ूल के अवकाशों की ख़िलाफ़त की है ये एक सशक्त और सराहनीय पहल है क्यूंकि ये छुट्टियां देश की तरक्की और विकास में बाधक है और विद्यार्थियों के मानसिक विकास को भी प्रभावित करती हैं. अगर बात उत्तर प्रदेश की करें तो यहाँ अवकाश तालिका में 52 अवकाश और 53 इतवार हैं, ऐसे में योगी आदित्यनाथ की पहल सराहनीय हैं क्यूंकि महापुरुषों के जीवन को समझ कर उनके पदचिन्हों पर चलकर भारत विकास के पथ पर दौड़ेगा वरना साहब आप ही बताएं इतनी छुट्टियों में कैसे पढ़ेगा इण्डिया और कैसे बढ़ेगा इण्डिया।

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